स्वामी विवेकानन्द के अध्यात्मिक दर्शन में निहित शैक्षिक तत्वों का अनुशीलन
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Abstract
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य “स्वामी विवेकानन्द के आध्यात्मिक दर्शन में निहित शैक्षिक तत्वों का अनुशीलन” करना है। स्वामी विवेकानन्द का आध्यात्मिक दर्शन केवल आत्मज्ञान और ईश्वरानुभूति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें शिक्षा के व्यापक, मानवीय एवं नैतिक उद्देश्यों का समावेश दिखाई देता है। उन्होंने शिक्षा को मनुष्य में अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति का माध्यम माना तथा चरित्र-निर्माण, आत्मविश्वास, आत्मानुशासन, विवेक, नैतिकता, सेवा-भाव और मानवीय मूल्यों को शिक्षा का महत्त्वपूर्ण आधार माना। प्रस्तुत अध्ययन में उनके आध्यात्मिक विचारों के अन्तर्गत निहित शैक्षिक तत्वों का दार्शनिक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टि से अध्ययन किया गया है। अध्ययन में उनके साहित्य, भाषणों, पत्रों तथा शिक्षा सम्बन्धी विचारों का अनुशीलन करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में किस प्रकार सहायक हो सकती है। विवेकानन्द के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व का समन्वित विकास करना है। उनके शैक्षिक दर्शन में आत्मनिर्भरता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व, नारी शिक्षा तथा मानव-सेवा को विशेष महत्त्व प्राप्त है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उनके विचार मूल्यपरक, चरित्रनिष्ठ एवं समग्र शिक्षा के विकास के लिए अत्यन्त प्रासंगिक हैं।
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