बस्तर जिले के आदिवासी परिवारों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच, उपयोग एवं लाभ-प्राप्ति की बाधाएँ: सामाजिक कार्य के सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन

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विरेंद्र कुमार खंण्डेलवाल , डॉ. तूलिका शर्मा, डॉ समीर ठाकुर

Abstract

सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्त्वपूर्ण संस्थागत माध्यम हैं। तथापि, किसी योजना की उपलब्धता तथा पात्र परिवारों द्वारा उसका वास्तविक लाभ प्राप्त करना अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। इस अंतर को समझने के लिए केवल प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक संरचना, व्यक्तिगत क्षमताओं, संस्थागत प्रक्रियाओं और समुदाय की भागीदारी का सैद्धांतिक विश्लेषण भी आवश्यक है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के आदिवासी परिवारों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच, उनके उपयोग और लाभ-प्राप्ति की बाधाओं को सामाजिक कार्य के प्रमुख सिद्धांतों के आधार पर समझना है। अध्ययन में अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach), हिलेरी सिल्वर के सामाजिक बहिष्करण दृष्टिकोण (Social Exclusion Framework), सशक्तीकरण सिद्धांत (Empowerment Theory) तथा अधिकार-आधारित सामाजिक कार्य दृष्टिकोण (Rights-Based Approach) का उपयोग किया गया है। यह अध्ययन द्वितीयक साहित्य पर आधारित सैद्धांतिक एवं अवधारणात्मक विश्लेषण है। इसमें प्राथमिक सर्वेक्षण अथवा काल्पनिक सांख्यिकीय परिणामों का उपयोग नहीं किया गया है। वैचारिक विश्लेषण से यह तर्क विकसित होता है कि योजनाओं की प्रभावशीलता को पात्रता से लेकर वास्तविक लाभ-प्राप्ति तक की पूरी प्रक्रिया के संदर्भ में समझना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित न होकर अधिकारों के प्रति जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी, संस्थागत समन्वय और नीतिगत सुधार तक विस्तृत हो सकती है। यह शोधपत्र आदिवासी कल्याण और सामाजिक कार्य के अध्ययन के लिए एक सैद्धांतिक ढाँचा प्रस्तुत करता है, जिसकी बस्तर जिले में व्यावहारिक उपयोगिता भविष्य के अनुभवजन्य शोध द्वारा जाँची जा सकती है।

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विरेंद्र कुमार खंण्डेलवाल , डॉ. तूलिका शर्मा, डॉ समीर ठाकुर. (2026). बस्तर जिले के आदिवासी परिवारों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच, उपयोग एवं लाभ-प्राप्ति की बाधाएँ: सामाजिक कार्य के सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(04), 93–104. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/1350
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