महिला सशक्तिकरण और नारीवादः अवधारणा, विकास और समकालीन विमर्श।
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Abstract
किसी भी देश के सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक विकास में महिलाओं की बहुत भूमिका होती है। समाज में महिलाओं की वहीं भूमिका है जो शरीर में दौड़ने वाले रक्त की। किसी राज्य, देश अथवा समाज को समझने जानने का कार्य तब तक पूरा नहीं किया जा सकता जब तक कि महिलाओं की वस्तु स्थिति पर विचार न कर लिया जाये। महिलाओं की दासता का इतिहास बहुत ही पुराना है। आज का समाज भले ही शक्षित हो गया है लेकिन वह महिलाओं के बारे में पाश्चात्य एवं मध्ययुगीन सोच रखता है। जिसके कारण पुरूष-महिलाओं के जन्म दर में काफी अंतर है, जो महिला सषक्तिकरण न हो पाने को इंगित करता है। इसके अलावा दहेज, जाति, धर्म, लिंग, नस्ल आदि के नाम पर अपमानजनक जीवन व्यतीत करना पड़ता है।
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