पर्यावरण प्रदूषण के क्षेत्र में गुरु जंभेश्वर का योगदानः एक अध्ययन
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Abstract
गुरु जम्भेश्वर जी, जिन्हें जम्भोजी के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 1451 ईस्वी में नागौर जिले के पीपासर में पंवार गोत्र के एक दूरदराज के राजस्थानी राजपूत परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम लोहाट जी पंवार और माता का नाम हंसा बाई था। जम्भोजी ने 27 साल जंगल में अकेले बैठकर, ध्यान करते हुए बिताए । उन्होंने 1485 में राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा के पास धोरा गांव में बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। उनकी शिक्षाएं काव्य रूप में थीं, जिन्हें शब्दवाणी के नाम से जाना जाता है। उनकी शिक्षाएं 29 सिद्धांतों और 120 शब्दों में शामिल हैं । उनतीस सिद्धांतों में से आठ पर्यावरण, जैव विविधता, पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं और साथ ही वे अच्छी पशुपालन और जीवित चीजों के प्रति दया की भावना को प्रेरित करते हैं। ये सिद्धांत जानवरों को मारने, हरे पेड़ काटने, बैलों की नसबंदी पर सख्ती से रोक लगाते हैं, और सभी जीवों के संरक्षण को प्रेरित करते हैं। जम्भोजी ने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और पर्यावरण संरक्षण के आंदोलन को धार्मिक दर्शन में बदल दिया। वर्तमान समय में जब दुनिया पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है, तो जम्भोजी की शिक्षाएं बहुत महत्वपूर्ण साबित होती हैं।
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