भारत विभाजन का पंजाब (हरियाणा) की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

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सुहावना
डॉ. राजबीर सिंह गुलिया

Abstract

1947 का भारत विभाजन भारतीय इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुखद घटना थी, जिसने देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया। इसका प्रभाव केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी इसके व्यापक परिणाम देखने को मिले। हरियाणा, जो उस समय अविभाजित पंजाब का हिस्सा था, विभाजन की इस प्रक्रिया से विशेष रूप से प्रभावित हुआ। विभाजन के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जनसंख्या का विस्थापन हुआ, जिसमें पश्चिमी पंजाब से आए शरणार्थियों ने हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में आकर बसावट की। इस अचानक जनसंख्या परिवर्तन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संरचना को पूरी तरह बदल दिया। इस शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य 1947 के भारत विभाजन के परिणामस्वरूप हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में द्वितीयक स्रोतों जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों, शोध लेखों, सरकारी रिपोर्टों तथा जनगणना आंकड़ों का उपयोग किया गया है। शोध का स्वरूप वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक है, जिसके माध्यम से विभाजन के आर्थिक प्रभावों को विभिन्न आयामों में समझने का प्रयास किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि विभाजन के कारण भूमि स्वामित्व के प्रतिरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, क्योंकि पाकिस्तान जाने वाले लोगों की भूमि का पुनर्वितरण शरणार्थियों के बीच किया गया। इसके अतिरिक्त, प्रारंभिक वर्षों में कृषि उत्पादन में अस्थिरता देखने को मिली, किंतु समय के साथ नई कृषि तकनीकों और श्रम शक्ति के आगमन से इसमें सुधार हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम संरचना, उत्पादन प्रणाली और सामाजिक संबंधों में भी बदलाव आए, जिससे एक नई ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण हुआ।

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How to Cite
सुहावना, & डॉ. राजबीर सिंह गुलिया. (2026). भारत विभाजन का पंजाब (हरियाणा) की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(2), 100–107. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/862
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References

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