साइबर समाज के निर्माण में ई-गवर्नेंस की भूमिका: भारत के विशेष संदर्भ में
Main Article Content
Abstract
इक्कीसवीं शताब्दी में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने समाज, शासन तथा अर्थव्यवस्था के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। इस परिवर्तनशील परिदृश्य में ई-गवर्नेंस एक ऐसी व्यवस्था के रूप में उभरा है, जिसने शासन-प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, प्रभावी तथा नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाओं, सूचनाओं तथा योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्मों द्वारा नागरिकों तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता और दक्षता आई है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य भारत के विशेष संदर्भ में साइबर समाज के निर्माण में ई-गवर्नेंस की भूमिका का विश्लेषण करना है।
शोध-पत्र मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिनमें पुस्तकों, शोध-पत्रों, सरकारी रिपोर्टों, नीति दस्तावेजों तथा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से संबंधित प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है। शोध-पत्र से ज्ञात होता है कि ई-गवर्नेंस ने भारत में डिजिटल नागरिकता, ऑनलाइन सहभागिता, सूचना तक पहुँच तथा सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ बनाया है। डिजिटल इंडिया, आधार, डिजिलॉकर, उमंग, ई-हॉस्पिटल, ई-कोर्ट तथा डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसी पहलों ने नागरिकों और शासन के मध्य संबंधों को अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाया है। इन पहलों ने न केवल प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि की है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं।
शोध से यह भी स्पष्ट होता है कि ई-गवर्नेंस ने साइबर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जहाँ नागरिक डिजिटल माध्यमों द्वारा संवाद, सहभागिता, सूचना विनिमय तथा सेवा प्राप्ति की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से सम्मिलित हो रहे हैं। तथापि डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा संबंधी खतरे, डेटा गोपनीयता की चुनौतियाँ, डिजिटल साक्षरता का अभाव तथा तकनीकी अवसंरचना की सीमाएँ अभी भी साइबर समाज के समावेशी विकास में बाधक हैं। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत में ई-गवर्नेंस साइबर समाज के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है तथा इसके माध्यम से समावेशी, उत्तरदायी और तकनीक-संचालित समाज के निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
Article Details

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
References
. कास्टेल्स, मैनुअल, नेटवर्क समाज का उदय, ब्लैकवेल पब्लिशर्स, ऑक्सफोर्ड, 1996, पृ. 37
. हिक्स, रिचर्ड, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और विकास, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली, 2009, पृ. 64
. हिक्स, रिचर्ड, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और विकास, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली, 2009, पृ. 72
. होम, क्रिस्टोफर, डिजिटल शासन और लोक प्रशासन, रूटलेज प्रकाशन, लंदन, 2011, पृ. 48
. मिश्रा, अरविन्द, ई-गवर्नेंस और लोक सेवा वितरण, सेज प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018, पृ. 84
. वुल्फेन्सन, जेम्स डेविड, सुशासन और विकास, विश्व बैंक प्रकाशन, वाशिंगटन, 1998, पृ. 29
. हुड, क्रिस्टोफर, लोक प्रबंधन का नया प्रतिमान, मैकमिलन प्रकाशन, लंदन, 1991, पृ. 18
. डनलेवी, पैट्रिक, डिजिटल युग का शासन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, ऑक्सफोर्ड, 2006, पृ. 95
. कास्टेल्स, मैनुअल, नेटवर्क समाज का उदय, ब्लैकवेल पब्लिशर्स, ऑक्सफोर्ड, 1996, पृ. 469
. गिब्सन, विलियम, न्यूरोमेंसर, ऐस बुक्स, न्यूयॉर्क, 1984, पृ. 51
. टैप्सकॉट, डॉन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, मैकग्रा-हिल प्रकाशन, न्यूयॉर्क, 1996, पृ. 112
. कास्टेल्स, मैनुअल, नेटवर्क समाज का उदय, ब्लैकवेल पब्लिशर्स, ऑक्सफोर्ड, 1996, पृ. 471
. हिक्स, रिचर्ड, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और विकास, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली, 2009, पृ. 112
. वान डाइक, जान, नेटवर्क समाज, सेज प्रकाशन, लंदन, 2012, पृ. 86
. टैप्सकॉट, डॉन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, मैकग्रा-हिल प्रकाशन, न्यूयॉर्क, 1996, पृ. 137
. स्टिग्लिट्ज़, जोसेफ ई., वैश्वीकरण और विकास, डब्ल्यू. डब्ल्यू. नॉर्टन एंड कंपनी, न्यूयॉर्क, 2002, पृ. 214
. नंदा, वी. आर., ग्रामीण विकास और सूचना प्रौद्योगिकी, सेज प्रकाशन, नई दिल्ली, 2015, पृ. 104
. डनलेवी, पैट्रिक, डिजिटल युग का शासन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, ऑक्सफोर्ड, 2006, पृ. 163
. नॉरिस, पिप्पा, डिजिटल डिवाइड, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज, 2001, पृ. 53