कोटरी नदी बेसिन में भूमि उपयोग प्रतिरूप का अध्ययन

Main Article Content

आशा साहू

Abstract

भूमि उपयोग प्रतिरूप किसी भी नदी बेसिन की भौगोलिक संरचना, प्राकृतिक संसाधन संपदा, पारिस्थितिकीय संतुलन तथा सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा और दशा का दर्पण होता है। वर्तमान शोध का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य स्थित कोटरी नदी बेसिन के चयनित विकासखण्डों में विद्यमान भूमि उपयोग प्रतिरूप का बहुआयामी, मात्रात्मक एवं सांख्यिकीय विश्लेषण प्रस्तुत करना है। अध्ययन क्षेत्र का अक्षांशीय विस्तार 19°13′30″ से 20°43′00″ उत्तर तथा देशांतर विस्तार 80°22′00″ से 82°00′15″ पूर्व के मध्य अवस्थित है। अनुसंधान में बहु-स्तरीय यादृच्छिक निदर्शन  पद्धति के माध्यम से 400 उत्तरदाताओं का चयन किया गया। प्रत्येक चयनित विकासखण्ड से एक ग्राम पंचायत तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत से तीन ग्रामों का चयन कर प्राथमिक आँकड़ों का संकलन संरचित अनुसूची एवं प्रश्नावली द्वारा किया गया, जबकि द्वितीयक आँकड़े भू-अभिलेख कार्यालय, राजस्व अभिलेख, जनगणना प्रतिवेदन, उपग्रह चित्रों तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित स्रोतों से प्राप्त किए गए।


संकलित आँकड़ों का विश्लेषण वर्णनात्मक सांख्यिकी, प्रतिशत विश्लेषण, काई-वर्ग  परीक्षण तथा अन्य उपयुक्त सांख्यिकीय तकनीकों के माध्यम से किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष इंगित करते हैं कि कृषि भूमि अध्ययन क्षेत्र की प्रमुख भूमि उपयोग श्रेणी है, जबकि वनाच्छादित क्षेत्र, परती भूमि, बंजर भूमि एवं अधिवासीय क्षेत्र का वितरण विकासखण्डों के अनुसार उल्लेखनीय स्थानिक विविधता प्रदर्शित करता है। सांख्यिकीय परीक्षणों से यह भी प्रमाणित हुआ कि विभिन्न विकासखण्डों के मध्य भूमि उपयोग प्रतिरूप में सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर विद्यमान है। यह स्थिति प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों, स्थलाकृतिक विविधताओं, संसाधन उपलब्धता, जनसंख्या दबाव तथा मानवीय हस्तक्षेप के संयुक्त प्रभाव को परिलक्षित करती है।


अध्ययन के निष्कर्ष सतत् भूमि संसाधन प्रबंधन, नदी बेसिन आधारित क्षेत्रीय नियोजन, कृषि भूमि संरक्षण, पारिस्थितिकीय संतुलन की पुनर्स्थापना तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित निर्णय-निर्माण के लिए नीतिगत रूप से उपयोगी आधार प्रदान करते हैं। यह शोध कोटरी नदी बेसिन में भूमि उपयोग परिवर्तन की वैज्ञानिक समझ विकसित करने के साथ-साथ भावी क्षेत्रीय विकास योजनाओं एवं पर्यावरणीय प्रबंधन रणनीतियों के निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

Article Details

How to Cite
आशा साहू. (2026). कोटरी नदी बेसिन में भूमि उपयोग प्रतिरूप का अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(3), 118–135. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/1132
Section
Articles

References

अकीला, एस. पी., एवं प्रगासन, एल. ए. (2026). भारत के तीव्र शहरीकरण वाले तटीय क्षेत्र में भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तन का स्थानिक–कालिक विश्लेषण तथा पूर्वानुमान। डिस्कवर एनवायरनमेंट, 4, 183. https://doi.org/10.1007/s44274-026-00708-1

आइगेनब्रॉड, एफ., एलेक्ज़ेंडर, पी., एप्फेल, एन., अथानासियाडिस, आई. एन., बर्जर, टी., बुलॉक, जे. एम., डुवेलियर, जी., इक्विहुआ, जे., मेनेज़ेस, आई., मोरेइरा, आर., पाउडेल, डी., सितोकोन्स्टैन्टिनू, वी., राइखस्टीन, एम., विलकॉक, एस., एवं वुडमैन, टी. (2026). भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तन को समझने के लिए कारणात्मक मशीन लर्निंग विधियाँ। लैंडस्केप इकोलॉजी, 41, लेख 25. https://doi.org/10.1007/s10980-025-02279-7

चावेस, एम. ई. डी., पिकोली, एम. सी. ए., एवं सांचेस, आई. डी. (2020). भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण मानचित्रण हेतु Landsat-8/OLI तथा Sentinel-2/MSI के नवीन अनुप्रयोग: एक व्यवस्थित समीक्षा। रिमोट सेंसिंग, 12(18), 3062. https://doi.org/10.3390/rs12183062

चेन, एक्स., ली, वाई., एवं वांग, जेड. (2022). भूमि उपयोग परिवर्तन एवं पारितंत्र सेवाएँ: एक समीक्षा। इकोलॉजिकल इंडिकेटर्स, 143, 109428. https://doi.org/10.1016/j.ecolind.2022.109428

दोग्रुयोल, पी. जी. (2026). मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करते हुए भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण वर्गीकरण की सर्वोत्तम पद्धति तथा कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क द्वारा भविष्य के भूमि उपयोग का पूर्वानुमान। एडवांसेज़ इन स्पेस रिसर्च, 77(12), 11766–11783.

भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तनों का वैश्विक प्रवृत्ति आकलन: भविष्य के अनुसंधान विकास एवं नियोजन हेतु एक व्यवस्थित दृष्टिकोण। (2024). जर्नल ऑफ किंग सऊद यूनिवर्सिटी – साइंस, 36(7), 103262.

गुन्दुज़, एच. आई., ओरहान, ओ., हमाल, एस. एन. जी., एवं एकेरसिन, एस. (2026). बहु-सेंसर रिमोट सेंसिंग आधारित भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण वर्गीकरण के लिए व्याख्यायोग्य तथा अनुकूलित मशीन लर्निंग रूपरेखा। ट्रांज़ैक्शन्स इन जीआईएस, 30(3), e70293. https://doi.org/10.1111/tgis.70293

कुमार, पी., सिंह, आर., एवं शर्मा, ए. (2022). सतत् भूमि संसाधन नियोजन के लिए जीआईएस आधारित जलागम प्रबंधन दृष्टिकोण। जर्नल ऑफ एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट, 318, 115563. https://doi.org/10.1016/j.jenvman.2022.115563

ली, एक्स., झांग, वाई., एवं लियू, एच. (2022). भू-स्थानिक तकनीकों द्वारा भूमि उपयोग संक्रमण का स्थानिक मॉडलन। लैंडस्केप इकोलॉजी, 37(8), 2035–2052.

महेश्वरी, एस. (2026). Sentinel-2 (10 मीटर) आँकड़ों के आधार पर भारत में सात वर्षीय अवधि तथा COVID-19 लॉकडाउन के दौरान भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तन। रिमोट सेंसिंग लेटर्स, 17(7), 739–752. https://doi.org/10.1080/2150704X.2026.2668056

मोहनराजन, एस. एन., लोगनाथन, ए., एवं मनोहरन, पी. (2020). रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस परिवेश में भूमि उपयोग/भूमि आवरण परिवर्तन विश्लेषण पर सर्वेक्षण: तकनीकें एवं चुनौतियाँ। एनवायरनमेंटल साइंस एंड पॉल्यूशन रिसर्च, 27(24), 29900–29926. https://doi.org/10.1007/s11356-020-09091-7

पटेल, डी., जोशी, एस., एवं कुमार, आर. (2024). भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए मध्य भारत में भूमि उपयोग की गतिशीलता। अरेबियन जर्नल ऑफ जियोसाइंसेज़, 17, 214.

रहमान, एस., कुमार, पी., चेन, आर., मीडोज़, एम. ई., एवं सिंह, आर. बी. (2020). पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जनपद में भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तन के पर्यावरणीय प्रभावों का रिमोट सेंसिंग आधारित आकलन। फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल साइंस, 8, 127. https://doi.org/10.3389/fenvs.2020.00127

रित्से, वी., बसुमातारी, एच., कुलनु, ए. एस., दत्ता, जी., फुकन, एम. एम., एवं हजारिका, एन. (2020). नागालैंड (पूर्वी हिमालय) में भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तनों का अनुश्रवण। एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट, 192, 711. https://doi.org/10.1007/s10661-020-08674-8

रॉय, पी. एस., एवं अन्य. (2021). प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियाँ। करंट साइंस, 120(4), 645–657.

शर्मा, एम., कुमार, वी., एवं कुमार, एस. (2024). भारत में शहरी विस्तार एवं भूमि उपयोग/भूमि आवरण परिवर्तन अध्ययनों की एक व्यवस्थित समीक्षा। सस्टेनेबल एनवायरनमेंट, 10(1), 2331269.

शर्मा, आर., एवं गुप्ता, एन. (2021). नदी बेसिन प्रबंधन एवं सतत विकास: एक भू-स्थानिक परिप्रेक्ष्य। सस्टेनेबल वाटर रिसोर्सेज मैनेजमेंट, 7(6), 102.

तालुकदार, एस., सिंघा, पी., महतो, एस., शाहफहाद, पाल, एस., लिओउ, वाई.-ए., एवं रहमान, ए. (2020). उपग्रह प्रेक्षणों के लिए मशीन लर्निंग वर्गीकारकों द्वारा भूमि उपयोग–भूमि आवरण वर्गीकरण: एक समीक्षा। रिमोट सेंसिंग, 12(7), 1135. https://doi.org/10.3390/rs12071135

वांग, वाई., ली, जे., एवं झाओ, एच. (2024). Sentinel चित्रों का उपयोग करते हुए भूमि उपयोग परिवर्तन का परिवर्तन-अन्वेषण। रिमोट सेंसिंग, 16(5), 812.

वुडमैन, टी., एलेक्ज़ेंडर, पी., बर्सलेम, डी. एफ. आर. पी., ट्रैविस, जे. एम. जे., एवं आइगेनब्रॉड, एफ. (2026). परिदृश्य प्रतिरूपों को सम्मिलित करने से वैश्विक स्तर के भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण परिवर्तन मॉडलों में सुधार। जर्नल ऑफ लैंड यूज़ साइंस, 21(1), 35–55. https://doi.org/10.1080/1747423X.2026.2622710

Similar Articles

<< < 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.