रामराज्य की शासन व्यवस्था: आदर्श नेतृत्व और जनकल्याण की अवधारणा
Main Article Content
Abstract
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य रामायण के आलोक में रामराज्य की शासन व्यवस्था का समीक्षात्मक अध्ययन करना है, जिसमें आदर्श नेतृत्व, न्यायप्रियता और जनकल्याण की अवधारणा को प्रमुखता से विश्लेषित किया गया है। रामराज्य को भारतीय राजनीतिक चिंतन में आदर्श शासन प्रणाली के रूप में स्वीकार किया जाता है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि भगवान राम का शासन धर्म, सत्य, करुणा और समानता के सिद्धांतों पर आधारित था। राम स्वयं को प्रजा का सेवक मानते थे और व्यक्तिगत सुख की अपेक्षा लोककल्याण को प्राथमिकता देते थे। शोध में यह भी दर्शाया गया है कि रामराज्य में कानून सभी के लिए समान था तथा राजा और सामान्य नागरिक में कोई भेद नहीं किया जाता था। सामाजिक समरसता, आर्थिक समृद्धि और नारी सम्मान रामराज्य की प्रमुख विशेषताएँ थीं। किसी भी प्रकार का शोषण, भ्रष्टाचार और अन्याय वहाँ नहीं था। इस अध्ययन के माध्यम से आधुनिक शासन व्यवस्था के लिए रामराज्य से प्रेरणा लेने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। वर्तमान समय में नैतिक नेतृत्व, पारदर्शी प्रशासन और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सुदृढ़ करने हेतु रामराज्य के आदर्श अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होते हैं।
Article Details

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
References
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण (प्रथम खण्ड) संस्करण (2078) गीताप्रेस गोरखपुर
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण (द्वितीय खण्ड) संस्करण (2078) गीताप्रेस गोरखपुर
अध्यात्म रामायण (अनुवादक श्रीमुनिलाल गुप्त) संस्करण (2077) गीताप्रेस गोरखपुर)
श्रीरामचरितमानस (श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजी विरचित) टीकाकार, हनुमान प्रसाद पोद्दार (गीताप्रेस गोरखपुर)
रामकथा का मर्म (डॉ॰ चन्द्रपाल शर्मा), प्रथम संस्करण (2022)