शैलेश मटियानी के कथा-साहित्य में मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति
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Abstract
शैलेश मटियानी हिन्दी साहित्य के ऐसे सशक्त कथाकार हैं, जिनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना का व्यापक स्वरुप परिलक्षित होता है। उन्होंने समाज के हाशिए पर खड़े,उपेक्षित, शोषित तथा संघर्षशील मनुष्यों के जीवन को अपनी रचनाओं का केन्द्र बनाया, उनकी संवेदना केवल करुणा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मुनष्य के अस्तित्व, उसकी गरिमा, संघर्ष, आशा और जिजीविषा की संवेदना है। मटियानी ने अपने कथा-साहित्य में ग्रामीण, आंचलिक, नगरीय तथा निम्नवर्गीय जीवन के विविध-आयामों को प्रस्तुत किया है। उनके साहित्य में स्त्री, दलित, मजदूर, विस्थापित और अभावग्रस्त वर्ग के जीवनानुभवों का सशक्त चित्रण मिलता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में शैलेश मटियानी के साहित्य में निहित संवेदना के विविध पक्षों - मानवीय करुणा, सामाजिक चेतना, स्त्री-संवेदना, लोक-संवदेना,तथा पर्वतीय जीवन बोध का विश्लेषण किया है।
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References
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