आदमी और समाज: आधुनिक हिंदी कहानियों में मनोवैज्ञानिक अनुभव

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ऊषा रानी

Abstract

यह शोधपत्र आधुनिक हिंदी कहानियों में आदमी और समाज के संबंधों के मनोवैज्ञानिक अनुभवों का विश्लेषण करता है। इसमें 2010 से 2024 के बीच प्रकाशित कहानियों का चयन कर यह देखा गया है कि किस प्रकार इन कहानियों में व्यक्ति की मानसिकता, भावनात्मक संघर्ष, सामाजिक दबाव और अस्तित्ववादी चुनौतियों की प्रस्तुति की जाती है। अध्ययन में यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक हिंदी कहानीकारों ने न केवल सामाजिक यथार्थ को उजागर किया है, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को भी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। यह शोध गहराई से दिखाता है कि हिंदी कहानियाँ समाज और व्यक्ति के बीच की जटिलताओं को किस प्रकार उजागर करती हैं और मनोविज्ञान के स्तर पर पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।

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How to Cite
ऊषा रानी. (2025). आदमी और समाज: आधुनिक हिंदी कहानियों में मनोवैज्ञानिक अनुभव. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(4), 774–782. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/978
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