हिन्दी ऐतिहासिक नाटकों में राष्ट्रीय चेतना का विकास: जयशंकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा और लक्ष्मीनारायण मिश्र के नाटकों का तुलनात्मक अध्ययन

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दीपक सिंह, डॉ. गणेशलाल जैन

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हिन्दी साहित्य में ऐतिहासिक नाटक केवल अतीत की घटनाओं का नाट्य-रूपांतरण मात्र नहीं है,  वह राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक स्मृति और सामूहिक अस्मिता के निर्माण का एक सशक्त साहित्यिक माध्यम रहा है। विशेषतः औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता-पूर्व भारत में ऐतिहासिक नाटकों ने भारतीय समाज को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ते हुए राष्ट्रीय आत्मबोध को सुदृढ़ किया। प्रस्तुत शोध-पत्र में जयशंकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा और लक्ष्मीनारायण मिश्र के प्रमुख ऐतिहासिक नाटकों के आलोक में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार इन नाटककारों ने इतिहास का सृजनात्मक पुनर्पाठ करते हुए राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव, नैतिक मूल्यों तथा राजनीतिक आत्मसम्मान की अवधारणाओं को विकसित किया। यह अध्ययन तुलनात्मक पद्धति के माध्यम से न केवल इन तीनों नाटककारों की वैचारिक समानताओं और भिन्नताओं को रेखांकित करता है,  यह भी स्पष्ट करता है कि हिन्दी ऐतिहासिक नाटक आधुनिक भारत में राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक उपकरण रहा है।

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दीपक सिंह, डॉ. गणेशलाल जैन. (2025). हिन्दी ऐतिहासिक नाटकों में राष्ट्रीय चेतना का विकास: जयशंकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा और लक्ष्मीनारायण मिश्र के नाटकों का तुलनात्मक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(4), 522–532. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/717
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