सरस्वती नदी बेसिन की सभ्यतागत: एक विश्लेषण
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Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र सरस्वती नदी बेसिन की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत का ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सरस्वती नदी भारतीय सभ्यता की उत्पति, विकास और सांस्कृतिक निरन्तरता में केन्द्रीय भूमिका निभाने वाली नदी रही है। वैदिक साहित्य में इसे ‘‘नदितमा’’, ‘‘अंबितमे’’ और ‘‘देवीतमे’’ जैसे विश्लेषणों से संबोधित किया गया है, जो इसके भौगोलिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को स्पष्ट करते हैं। सरस्वती नदी बेसिन सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता का प्रमुख क्षेत्र रहा है , जहाँ सुव्यवस्थित नगर योजना, उन्नत जल निकासी प्रणाली, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, शिल्प एवं व्यापार के प्रमाण प्राप्त होते हैं। राखी गढ़ी, कालीबंगा, बनवाली, फरमाना एवं अन्य पुरातात्विक स्थल इस क्षेत्र की विकसित सामाजिक-आर्थिक संरचना को रेखांकित करते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों - विशेषतः उपग्रह चित्रण, भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं पेलियों-चैनल अध्ययन से यह सिद्ध हुआ है की सरस्वती नदी का विस्तार प्रवाह क्षेत्र था, जो वर्तमान घग्गर-हकरा नदी प्रणाली से संबद्ध रहा है। इस प्रकार यह शोध-पत्र सरस्वती नदी बेसिन को भारतीय सभ्यता की एक मूलभूत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करता है।
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