गांधीवाद का राष्ट्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

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Bablu Kumar Jayswal, Dr.Rathod Duryodhan Devidas

Abstract

यह शोध-पत्र गांधीवाद के राष्ट्रीय एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य का समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है तथा यह प्रतिपादित करता है कि गांधीवाद केवल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की विचारधारा नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक दर्शन है। महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नैतिक शक्ति प्रदान की और समाज के व्यापक वर्गों को राजनीतिक चेतना से जोड़ा। राष्ट्रीय स्तर पर गांधीवाद ने सामाजिक समानता, छुआछूत उन्मूलन, ग्राम स्वराज, स्वदेशी और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं वैश्विक स्तर पर गांधीवादी अहिंसा ने उपनिवेश-विरोधी आंदोलनों, नागरिक अधिकार संघर्षों और शांति प्रयासों को नई दिशा दी। समकालीन विश्व में हिंसा, असमानता, पर्यावरण संकट और नैतिक पतन की चुनौतियों के संदर्भ में गांधीवाद एक मानवीय, न्यायपूर्ण और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभरता है। यह अध्ययन निष्कर्षतः स्थापित करता है कि गांधीवाद आज भी राष्ट्रीय और वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु अत्यंत प्रासंगिक है।

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How to Cite
Bablu Kumar Jayswal, Dr.Rathod Duryodhan Devidas. (2024). गांधीवाद का राष्ट्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 1(2), 678–688. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/709
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