अंधेरी गलियों से उजालों तक: हिंदी कथा साहित्य में सामाजिक यथार्थ
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Abstract
यह शोधपत्र हिंदी कथा साहित्य में सामाजिक यथार्थ की प्रस्तुति का विस्तार से विश्लेषण करता है। अध्ययन का फोकस 2003 से 2024 तक की कहानियों और उपन्यासों पर है, जिसमें सामाजिक असमानता, जातिवाद, गरीबी, लैंगिक अन्याय, शहरीकरण, और संघर्षशीलता जैसी विविध समस्याओं को उजागर किया गया है। यह शोध यह दिखाता है कि हिंदी कथा साहित्य ने समाज के अंधेरे पक्षों को उजागर करने के साथ-साथ उनमें आशा और परिवर्तन की संभावनाएँ भी प्रस्तुत की हैं। साहित्यकारों ने अपने पात्रों, कथानकों और शिल्प के माध्यम से सामाजिक बदलाव, संघर्ष, और मानवीय जिजीविषा को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया है।
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