ग्रामीण हरियाणा से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनः एक ऐतिहासिक अध्ययन

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सन्तरो कुमारी
डॉ. राजबीर सिंह गुलिया

Abstract

हरियाणा राज्य की स्थापना 1 नवम्बर 1966 को हुई। राज्य गठन के समय इसकी सामाजिक और आर्थिक संरचना मुख्यतः ग्रामीण तथा कृषि-आधारित थी। हरित क्रांति, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, उच्च उपज वाले बीजों का प्रयोग, कृषि यंत्रीकरण, सड़क एवं विद्युत सुविधाओं का विकास और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से निकटता ने हरियाणा की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की। कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उद्योग, परिवहन, व्यापार, निर्माण और सेवा क्षेत्रों का विस्तार हुआ। इस बदलती आर्थिक संरचना ने ग्रामीण जनसंख्या, विशेषकर भूमिहीन श्रमिकों, छोटे किसानों, शिक्षित युवाओं और रोजगार की तलाश करने वाले परिवारों को शहरी क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया। 1966 से 2000 तक ग्रामीण हरियाणा से शहरों की ओर प्रवासन केवल रोजगार की खोज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीण समाज के पारिवारिक संबंधों, कृषि व्यवस्था, आय-स्रोतों, महिलाओं की भूमिका, शिक्षा संबंधी आकांक्षाओं, उपभोग-व्यवहार और सामाजिक गतिशीलता को भी प्रभावित किया। 1991 की जनगणना के अनुसार हरियाणा की कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या 75.37 प्रतिशत थी, जबकि शहरी जनसंख्या लगभग 24.63 प्रतिशत थी। 1999-2000 के हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया कि राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा घट रहा था, जबकि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का योगदान बढ़ रहा था। यही आर्थिक परिवर्तन ग्रामीण से शहरी प्रवासन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तैयार करता है। यह शोध-पत्र 1966 से 2000 तक की अवधि में ग्रामीण हरियाणा से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन के कारणों, स्वरूप, सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और नीतिगत प्रयासों का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

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सन्तरो कुमारी, & डॉ. राजबीर सिंह गुलिया. (2026). ग्रामीण हरियाणा से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनः एक ऐतिहासिक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(2), 740–748. Retrieved from https://www.ijarmt.com/index.php/j/article/view/988
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References

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